मरकज़ुल मआरिफ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर, मुंबई में अंग्रेज़ी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन
“प्रदर्शन भाषण का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसे खास महत्व दिया जाता है” — मौलाना बुरहानुद्दीन क़ासमी
मुंबई, 6 सितंबर 2026
(मोहम्मद सलमान आलम कासमी) मदरसों से पढ़े छात्रों को अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य की बेहतर और मानक शिक्षा देने तथा उन्हें आज के दौर की ज़रूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाले मशहूर संस्थान मरकज़ुल मआरिफ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर (MMERC), मुंबई में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 की दूसरी अंग्रेज़ी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन बेहद शानदार और गरिमापूर्ण माहौल में किया गया।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण के लिए चुने गए आठ छात्रों ने अलग-अलग महत्वपूर्ण और मौजूदा दौर से जुड़े विषयों पर अंग्रेज़ी में भाषण पेश किए और अपनी इल्मी, फिक्री और भाषण देने की क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में शहर की कई जानी-मानी इल्मी और सामाजिक हस्तियों ने भी शिरकत की।

कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी अब्दुलफ़त्ताह की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई। तिलावत का अंग्रेज़ी अनुवाद मौलाना दिलशाद आलम ने पेश किया। इसके बाद मौलाना फ़ैज़ मोहम्मद क़ासमी ने नात पढ़ी।
कार्यक्रम की निज़ामत मौलाना तौक़ीर रहमानी ने की। उन्होंने मरकज़ुल मआरिफ का संक्षिप्त परिचय पेश करते हुए संस्थान के संस्थापक मौलाना मुहम्मद बदरुद्दीन अजमल क़ासमी साहब की देश और समाज के लिए की गई अहम सेवाओं को भी सामने रखा। वहीं संस्थान के नाज़िम-ए-तालीमात, मुफ़्ती जसिमुद्दीन क़ासमी साहब ने मेहमानों का परिचय कराया और उनका स्वागत किया।
प्रतियोगिता में हस्तियों ने जज की भूमिका निभाई। इनमें मरकज़ुल मआरिफ के डायरेक्टर मौलाना मोहम्मद बुरहानुद्दीन क़ासमी, इहतिशाम ऐबानी — सीनियर प्रोसेस एनेबलर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और दानियाल ख़ान — प्लानिंग एंड प्रोडक्शन मैनेजर, सिग्मा सील्स एलएलपी (Sigma Seals LLP) शामिल रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मरकज़ुल मआरिफ के प्रभारी मौलाना मुहम्मद अतीकुर्रहमान क़ासमी ने की। मरकज़ुल मआरिफ मस्जिद के इमाम मौलाना मुहम्मद शाहिद क़ासमी, तौफ़ीक़ सर सम्मानित अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
प्रतियोगिता के बाद जजों ने छात्रों के प्रदर्शन का जायज़ा पेश किया और उन्हें बेहद अहम राय, उपयोगी सुझाव और हौसला बढ़ाने वाली बातें बताईं।
श्री इहतिशाम ऐबानी ने छात्रों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि लोगों के सामने खड़े होकर अपनी बात रखना अपने आप में एक बड़ी परीक्षा है, लेकिन छात्रों ने जिस आत्मविश्वास और खूबसूरती के साथ अपने विचार पेश किए, वह काबिले-तारीफ़ है। उन्होंने कहा कि आज के दौर की ज़रूरतों को देखते हुए भाषण के लिए ऐसे विषयों का चुनाव किया जाना चाहिए, जिनका मौजूदा समय से गहरा संबंध हो। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि उनकी एक अहम ज़िम्मेदारी यह भी है कि वे इस्लामी शिक्षाओं की रोशनी में लोगों की सही रहनुमाई करें।

श्री दानियाल ख़ान ने सभी प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अंग्रेज़ी इन छात्रों की मातृभाषा नहीं है, इसके बावजूद उन्होंने जिस खूबसूरती और आत्मविश्वास के साथ अपने विचारों को पेश किया, वह काबिले-तारीफ़ है। उन्होंने कहा कि दीनि मदरसों से पढ़े छात्रों की एक अहम ज़िम्मेदारी यह है कि वे आधुनिक दुनिया और दीनि तबके के बीच एक पुल का काम करें, क्योंकि वे इस्लामी शिक्षाओं को दूसरों के मुकाबले अधिक गहराई से समझते हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि भाषा सीखने के साथ-साथ अपने संदेश को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने पर भी खास ध्यान दें।
मरकज़ुल मआरिफ के डायरेक्टर मौलाना बुरहानुद्दीन क़ासमी ने छात्रों की कोशिशों की सराहना करते हुए कहा कि आज के कार्यक्रम में सभी विषय बेहद अच्छे और महत्वपूर्ण थे। उन्होंने जज के रूप में अपने अनुभव की बात करते हुए कहा कि किसी भाषण प्रतियोगिता में फैसला करना आसान काम नहीं होता। जज केवल बोले गए शब्दों को नहीं देखते, बल्कि वक्ता की शारीरिक गतिविधियों, बोलने के अंदाज़, आवाज़ के उतार-चढ़ाव, उच्चारण, रवानी और शब्दों की अदायगी समेत भाषण के हर पहलू को बारीकी से देखते हैं।
उन्होंने खास तौर पर कहा कि प्रेज़ेंटेशन भाषण का एक बेहद अहम हिस्सा है और इसी वजह से इसे खास अहमियत दी जाती है। वक्ता को अपने विषय की प्रकृति के मुताबिक शब्दों, लेहजे और बोलने के अंदाज़ को अपनाना चाहिए।
अंतिम चरण के लिए चुने गए आठ छात्रों में मौलवी सईद अहमद क़ासमी ने पहला, मौलवी फ़ैज़ान क़ासमी ने दूसरा और मौलवी मोहम्मद हमज़ा क़ासमी ने तीसरा स्थान हासिल किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अतीकुर्रहमान क़ासमी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सभी मेहमानों, जजों और प्रतिभागियों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने सभी छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि वे लगातार मेहनत, अध्ययन और अभ्यास जारी रखें। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि भाषण प्रतियोगिता में जीत या हार असली मकसद नहीं है। असली कामयाबी यह है कि एक छात्र लोगों के सामने आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो, अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से पेश करे और अपने अंदर अपनी बात कहने की क्षमता पैदा करे। उन्होंने आगे कहा कि कुछ भाषण अपने प्रभावी अंदाज़, मजबूत सामग्री और दिल को छू लेने वाली प्रस्तुति की वजह से ऐसी छाप छोड़ते हैं कि वे लंबे समय तक याद रहते हैं।
कार्यक्रम का समापन मरकज़ुल मआरिफ मस्जिद के सम्मानित इमाम मौलाना मुहम्मद शाहिद क़ासमी की भावपूर्ण दुआ के साथ हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मरकज़ुल मआरिफ के शिक्षकों और सभी छात्रों, खास तौर पर मौलाना असलम जावेद क़ासमी, मौलाना जमील अहमद क़ासमी, मौलाना मोहम्मद सलमान आलम क़ासमी और संस्थान के अन्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।